Essay on Holi in Hindi (होली पर हिन्दी निबंध)

होली हिंदुओं के एक प्रमुख त्योहार के रूम में जाना जाता है। होली सिर्फ हिन्दुओं ही नहीं बल्कि सभी समुदाय के लोगों द्वारा उल्लास के साथ मनाया जाता है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को यह त्योहार मनाया जाता है। होली जिसे “रंगो के त्योहार” के नाम से भी जाना जाता है, भारत के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है।

भारत में होली का उत्सव अलग-अलग प्रदेशों में अलग अलग तरीके से मनाया जाता है। आज भी ब्रज की होली सारे देश के आकर्षण का बिंदु होती है। लठमार होली जो कि  बरसाने की है वो भी काफ़ी प्रसिद्ध है। इसमें पुरुष महिलाओं पर रंग डालते हैं और महिलाएँ पुरुषों को लाठियों तथा कपड़े के बनाए गए कोड़ों से मारती हैं। इसी तरह मथुरा और वृंदावन में भी १५ दिनों तक होली का पर्व मनाते हैं। कुमाऊँ की गीत बैठकी होती है जिसमें शास्त्रीय संगीत की गोष्ठियाँ होती हैं। होली के कई दिनों पहले यह सब शुरू हो जाता है।

होली का त्यौहार मनाने के पीछे एक प्राचीन इतिहास है। प्राचीन समय में हिरण्यकश्यप नाम के एक असुर हुआ करता था। उसकी एक दुष्ट बहन थी जिसका नाम होलिका था। हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानता था। हिरण्यकश्यप के एक पुत्र थे जिसका नाम प्रह्लाद था। वे भगवान विष्णु के बहुत बड़े भक्त थे। हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु के विरोधी था। उन्होंने प्रह्लाद को विष्णु की भक्ति करने से बहुत रोका। लेकिन प्रह्लाद ने उनकी एक भी बात नहीं सुनी। इससे नाराज़ होकर हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को जान से मारने का प्रयास किया। इसके लिए हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से मदद मांगी। होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था । उसके बाद होलिका प्रह्लाद को लेकर चिता में बैठ गई परन्तु विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका जल कर भस्म हो गई

आज भी पूर्णिमा को होली जलाते हैं, और अगले दिन सब लोग एक दूसरे पर गुलाल, अबीर और तरह-तरह के रंग डालते हैं। यह त्योहार रंगों का त्योहार है।

होली के त्योहार को लेकर बच्चों में विशेष उत्साह होता है। वे होलिका दहन के लिए काफी पहले से लकड़ियाँ जुटाने लगते हैं। गाँवों में तो लकड़ियाँ आसानी से मिल जाती हैं पर शहरों के बच्चे घरों के खराब खराब फर्नीचर की तलाश करते हैं और अपने घर के अलावा दूसरों से भी माँगकर व्यवस्था करते हैं। होलिका तैयार करने में सभी लकड़ियों का योगदान करते हैं। महिलाएँ घरों में होली के पर्व के लिए घर पर मिलने आने वाले लोगों के लिए मिठाइयाँ, नमकीन और गुझिया बनाने में जुट जाती हैं। रंग और गुलाल का स्टॉक तैयार किया जाता है। फाल्गुन मास की पूर्णमासी को होलिका दहन के साथ त्योहार की शुरुआत होती है और अगले दिन होली का रंग-बिरंगा त्योहार मनाया जाता है। लोग एक-दूसरे के घर जाकर रंग-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएँ देते हैं। शहरी संस्कृति ने होली मिलन कार्यक्रमों को जन्म दिया है जिसमें राजनैतिक दल, संस्थाएँ होली मिलन कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं।

होली हमारे समाज मे एकता, शांति, प्रेम और खुशी का संदेश देती है। यह आपस मे भाईचारे को बढावा देती है। अनेक प्रकार और अनेक धर्मो के लोग एक साथ एक दूसरे को रंग लग के इस देश की अखण्डता और एकता का संदेश देते है। होली संदेश है की हम एक थे, हम एक हैं और हम एक रहेंगे।

गणतंत्र दिवस (Republic Day of India)

गणतंत्र दिवस के बारे में

राष्ट्रीय पर्व के रुप में मनाया जाता है। 26 जनवरी का दिन भारतीय के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। 26 जनवरी 1950 को ही भारतीय संविधान लागू किया गया था। 

राष्ट्रीय अवकाश

इस दिन को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय अवकाश के रूप में घोषित किया गया है। इस दिन पुरे देश में सभी स्कूलों में कॉलेजों तथा अन्य शिक्षण संस्थानों राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है। सरकारी संस्थानों एवं शिक्षण संस्थानों में इस दिन ध्वजारोहण, झंडा वंदन करने के पश्चात राष्ट्रगान जन-गन-मन का गायन होता है और देशभक्ति से जुड़े विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।

गणतंत्र दिवस के बारे में कार्यक्रमों का आयोजन

भारत के राष्ट्रपति द्वारा ध्वजारोहण किया जाता है। इस दिन विशेष रूप से दिल्ली के विजय चौक से लाल किले तक होने वाली परेड आकर्षण का प्रमुख केंद्र होती है, जिसमें देश और विदेश के गणमान्य जनों को आमंत्रित किया जाता है। इस परेड में तीनों सेना के प्रमुख राष्ट्रीपति को सलामी दी जाती है एवं सेना द्वारा प्रयोग किए जाने वाले हथियार, प्रक्षेपास्त्र एवं शक्तिशाली टैंकों का प्रदर्शन किया जाता है एवं परेड के माध्यम से सैनिकों की शक्ति और पराक्रम को बताया जाता है।

शहीदों का स्मरण

गणतंत्र दिवस के दिन देश के शहीदों को और उनके बलिदान को याद किया जाता है तथा सभी शहीदों के स्मरण में मौन रखा जाता है।

इस दिन के कार्यक्रमों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थयों का सम्मान एवं पुरस्कार वितरण भी किया जाता है और मिठाई वितरण भी विशेष रूप से होता है।

गणतंत्र दिवस का इतिहास ( गणतंत्र दिवस क्या है? )

भारत की आजादी के बाद 9 दिसम्बर 1947 को संविधान सभा बनाने की शुरुआत की जिसे 2 वर्ष 11 माह व 18 दिन में बना कर तैयार किया गया। इसी दिन भारतीय सरकार द्वारा भारत में पूर्ण स्वराज को भी घोषित कर दिया गया था और उस दिन से 26 जनवरी गणंतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।

गणतंत्र दिवस भारत का राष्ट्रीय पर्व है, जिसे प्रत्येक भारतवासी पूरे उत्साह, जोश और सम्मान के साथ मनाता है। राष्ट्रीय पर्व होने के नाते इसे हर धर्म, संप्रदाय और जाति के लोग मनाते हैं।

इस प्रकार गणतंत्र दिवस पर 10 लाइन हिंदी में बताइ गई है। यह गणतंत्र दिवस के बारे में निबंध है।

Gantantra Diwas quotes in Hindi

हमें जान से प्यारा यह गणतंत्र हमारा, याद रखेंगे शहीदों को और बलिदान तुम्हारा।

ज़माने भर में मिलते हैं आशिक कई, मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता, नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हैं शासक कई, मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता..!! 

ना जियो धर्म के नाम पर ना मरो धर्म के नाम पर इंसानियत ही है धर्म वतन का बस जियो वतन के नाम पर गणतंत्र  दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

जब तक जिन्दा रहूं, इस मातृ-भूमि के लिए और जब मरुं तो तिरंगा कफन चाहिए. गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

काँटो में भी फूल खिलाएं इस धरती को स्वर्ग बनाएं आओ सबको गले लगाएं हम गणतंत्र का पर्व मनाएं. गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

Lohri essay in Hindi

लोहरी का पर्व भारत देश में मनाया जाने वाला त्यौहार है। इस पर्व को खासतौर से पंजाबी लोग मनाते है लेकिन कुछ अन्य जगहों पर भी लोहरी का त्यौहार बहुत धूम-धाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। प्रत्येक वर्ष इस त्यौहार को मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व मनाया जाता है। लोहड़ी का पर्व मनाने के पीछे बहुत सी ऐतिहासिक कथाएं प्रचलित है। जब पंजाब में फसल काटी जाती है और नई फसल बोई जाती है इसे किसानो के नया साल भी कहा जाता है।

यह त्यौहार पंजाब में सबसे महत्वपूर्ण है और त्यौहार के दिन सभी पंजाबी लोग तैयार हो जाते हैं और वे त्यौहार के दिन अनोखे तरीके से उत्सव मनाने के लिए पारंपरिक रूप से कुछ विशेष कपड़े पहनते हैं। लोहड़ी का त्योहार मुख्य रूप से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में मनाया जाता है जहां पंजाबी, उत्तर भारतीय आबादी अधिक है।

ऐसा माना जाता है की उस समय से दिन छोटे और राते लम्बी होने लगती है। लोहरी के दिन सभी लोग नए नए कपडे पहनते है और खुशी मनाते है। सभी लोग लोहरी के लिए उपले और लकड़ियाँ एक स्थान पर इकठ्ठा करके उसका ढेर बना लेते है और शाम के समय उनको जला कर उसकी परिक्रमा करते है। सभी माताएं अपने छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर लोहड़ी की अग्नि की चक्कर लगाती है और अग्नि में मूंगफली, रेवड़ी, मेवे, गज्जक, पॉपकॉर्न आदि की आहुति देते है। ऐसा माना जाता है कि लोहड़ी के चक्कर लगाने से बच्चे को किसी की नजर नहीं लगती। किसानों द्वारा अपनी नई फसल का आहुति दी जाती है। प्रसाद के रूप में सभी लोगो में रेवड़ी, पॉपकॉर्न, मूंगफली का मिश्रण में बांटते हैं।

जैसा कि आप सभी जानते है कि पंजाब के लगभग सभी लोग खेती से जुड़े है। पंजाब में अधिक संख्या में किसान मिलेंगे और सभी किसान अपनी खेती में बहुत की मेहनत भी करते है। लोहड़ी के पर्व को सभी किसान अपनी फसल के कटने की ख़ुशी और साथ ही नयी फसल लगाने की खुशी में भी मनाया जाता है। लोहड़ी को किसानो का नया साल भी कहा जाता है। सभी किसान भाई और उनके परिवार ख़ुशी मनाते है और भंगड़ा करते है और साथ साथ बोलियाँ गाते है।

Lohri Mata ki Katha

नरवर किला एक ऐतिहासिक किला माना गया है जिसके ऊपर बहुत ही प्राचीन कथाएं हैं जिनमें से एक  लोहड़ी माता की कथा है। तो आज हम केवल लोहड़ी माता की कथा के बारे में जानेंगे।

नरवर किला और लोहड़ी माता का इतिहास ग्वालियर से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जिला शिवपुरी के नरवर शहर से संबंधित है। नरवर का इतिहास करीब 200 वर्ष पुराना है। 19वीं सदी में नरवर राजा ‘नल’ की राजधानी हुआ करती थी। नल नामक एक राजा हुआ करते थे। नरवर जोकि बीसवीं शताब्दी में नल पुर निसदपुर नाम से भी जाना जाता था।

नल राजा जोकि नरवर का जो राजा हुआ करता था उसे जुआ सट्टा खेलने का बहुत ही गंदी लत थी जिसके कारण नरवर राज्य अपने जिले में सारी की सारी संपत्ति हार गया था बाद में राजा नल के पुत्र मारू ने नरवर को जीता और वहां राजकीय नरम मारू एक बहुत ही अच्छा राजा माना गया था। मारू ढोला प्रेम कहानी जो कि पूरे राजस्थान में सबसे ज्यादा लोकप्रिय मानी जाती है।

नरवर की स्थानीय कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि लोहड़ी माता समुदाय से ताल्लुक रखती थी। बताया जाता है कि लोड़ी माता को तांत्रिक विद्या में महारत हासिल थी। वह धागे के ऊपर चलने का असंभव सा काम भी किया करती थी।

जब लोहड़ी माता ने अपने कारनामा राजा नल के भरे दरबार में दिखाया तो राजा नल के मंत्री ने लोहड़ी माता से जलन के कारण वह धागा काट दिया जिसके कारण लोहड़ी माता की अकाल मृत्यु हो गयी। तभी से लोढ़ी माता के श्राप से नरवर का किला खंडहर में बदल गया। वर्तमान समय में लोड़ी माता का मंदिर, लोहड़ी माता के भक्तों ने बनवाया है। यहां पूजा करने के साल भर लाखों श्रद्धालुओं का तांता लग जाता है।

लोहड़ी माता की मान्यता बहुत दूर-दूर तक है और प्रत्येक वर्ष हजारों लाखों की तादाद में लोग लोहड़ी माता के दर्शन करने जाते हैं। आपको यह कहानी कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताएं। आशा करता हूं आपको यह कहानी अच्छी लगी होगी और यह सत्य कहानी है, कहा जाता है लोहड़ी माता के यहां जाकर सारी की सारी मनोकामनाएं पूरी होती है।

Lohri wishes in Hindi

The word Lohri is also believed to have an origin from the word regional word ‘loh’ which means warmth and light of fire.
According to some beliefs, Lohri was considered to be Holika’s sister who survived with Prahlad, while Holika got burnt in the fire.

Below are some of the congratulatory messages which can be shared and these are in Hindi.

लोहड़ी की आग आपके दुखों को जला दे; और आग की रौशनी आपकी ज़िंदगी में उजाला भर दे। — लोहड़ी की शुभकामनाएं


फिर आ गई भंगड़े की बारी; लोहड़ी मनाने की करो तैयारी; आग के पास सब आओ; सुंदर-मुंदरिये जोर से गाओ; — लोहड़ी की शुभकामनाएं


हम आपके दिल में रहते हैं इसलिए हर गम सहते हैं,
कोई हम से पहले ना कह दे आपको, इसलिए हम पहले ही आपको “हैप्पी लोहड़ी” कहते हैं

लोहरी की आग में दहन हो सारे गम
खुशियां आए आप के जीवन में हरदम “हैप्पी लोहड़ी

काश ज्यादा पर चलेगी थोड़ी,
साथ जब हो एक सुन्दर सी छोरी,
मिल बाँट खाएं गुड़ की रेवरी,
और धूम से मनाएं हम सब लोहरी।
हैप्पी लोहरी!

दिल की ख़ुशी और अपनों का प्यार; मुबारक हो आपको लोहड़ी का त्यौहार || लोहड़ी की शुभकामनाएं!

चाँद को चांदनी मुबारक, दोस्त को दोस्ती मुबारक, मुझको आप मुबारक, मेरी तरफ से आपको लोहड़ी मुबारक॥

आपको और आपके परिवार को लोहड़ी की लाख-लाख बधाइयाँ,
रब करे अप के जीवन में इन्हों खुशियों की बारिश होवे,
आपको लोहरी उत्सव की बधाई हो।
हैप्पी लोहड़ी!

लोहरी कि आग आपके दुखों को जला दे,
आग की रोशनी आपकी जिंदगी उजालें भर दे,
लोहरी का प्रकाश आपकी जिंदगी प्रकाशमय कर दे,
जैसे-जैसे लोहड़ी की आग तेज़ हो
वैसे-वैसे हमारी दुखों का अंत हो!

पॉपकॉर्न की खुशबु, मूंगफली रेवड़ी की बहार, लोहरी का त्यौहार और अपनों का प्यार

थोड़ी सी मस्ती, थोडा प्यार, कुछ दिन पहले से आपको मुबारक हो लोहड़ी का त्यौहार, हैप्पी लोहड़ी 2022 ||

Lohri wishes in Punjabi

Suraj diyaan kirna, khushiyaan di bahaar, Nachde ne saare te vich baldi aag, Dhol di awaaj te nachdi mutiyaar, Mubaarak hove sarkaar Lohri da tyohaar.

ਲੋਹੜੀ ਦੀ ਅੱਗ ਤੁਹਾਡੇ ਜੀਵਨ ਦੇ ਸਾਰੇ ਉਦਾਸੀ ਨੂੰ ਸਾੜ ਦੇਵੇ ਅਤੇ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਖੁਸ਼ੀ, ਖੁਸ਼ੀ ਅਤੇ ਪਿਆਰ ਲੈ ਕੇ ਆਵੇ। ਤੁਹਾਨੂੰ ਅਤੇ ਤੁਹਾਡੇ ਪਰਿਵਾਰ ਨੂੰ ਲੋਹੜੀ ਦੀਆਂ ਬਹੁਤ ਬਹੁਤ ਮੁਬਾਰਕਾਂ

ਲੋਹੜੀ ਦੇ ਇਸ ਤਿਉਹਾਰ ਦੇ ਮੌਸਮ ‘ਤੇ, ਪ੍ਰਮਾਤਮਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਚੰਗੀ ਸਿਹਤ ਅਤੇ ਉਮਰ ਭਰ ਦਾ ਸਾਥ ਦੇਵੇ।

ਜੋਸ਼ ਅਤੇ ਉਤਸ਼ਾਹ ਦਾ ਇਹ ਤਿਉਹਾਰ ਤੁਹਾਡੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀ ਊਰਜਾ ਅਤੇ ਉਤਸ਼ਾਹ ਨਾਲ ਭਰ ਦੇਵੇ ਜੋ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਅੰਤਮ ਖੁਸ਼ਹਾਲੀ ਲਿਆਵੇਗਾ। ਲੋਹੜੀ ਮੁਬਾਰਕ!

Phir aa gayi bhangre di vaari,
Lohri manaun di karo taiyari,
Agg de kol saare aao,
Sundariye mundariye jor naal gao.

ਜੋਸ਼ ਅਤੇ ਉਤਸ਼ਾਹ ਦਾ ਇਹ ਤਿਉਹਾਰ ਤੁਹਾਡੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀ ਊਰਜਾ ਅਤੇ ਉਤਸ਼ਾਹ ਨਾਲ ਭਰ ਦੇਵੇ ਅਤੇ ਇਹ ਤੁਹਾਡੇ ਅਤੇ ਤੁਹਾਡੇ ਅਜ਼ੀਜ਼ਾਂ ਲਈ ਖੁਸ਼ਹਾਲੀ ਅਤੇ ਖੁਸ਼ਹਾਲੀ ਲਿਆਉਣ ਵਿੱਚ ਤੁਹਾਡੀ ਮਦਦ ਕਰੇ। ਲੋਹੜੀ ਮੁਬਾਰਕ!

Twinkle Twinkle Little Punjabi;
Peeke daaru oh ho geya sharabi;
Chicken tandoori te daal farayi;
Tuhanu lohri di lakh lakh vadhai!


Ganne de raas ton chinni di bori;
Fer bani uston mithi mithi reori;
Ral mil sare khaiya til de naal;
Te maniye assi khushiyan bhari Lohri!

ਲੋਹੜੀ ਦੇ ਇਸ ਸ਼ੁਭ ਦਿਹਾੜੇ ‘ਤੇ, ਮੈਂ ਤੁਹਾਡੇ ਸਾਰਿਆਂ ਲਈ ਸ਼ਾਂਤੀ, ਸਿਹਤ ਅਤੇ ਖੁਸ਼ਹਾਲੀ ਦੀ ਕਾਮਨਾ ਕਰਦਾ ਹਾਂ, ਇਹ ਤਿਉਹਾਰ ਤੁਹਾਡੇ ਅਤੇ ਤੁਹਾਡੇ ਪਰਿਵਾਰ ਲਈ ਬੇਅੰਤ ਖੁਸ਼ੀਆਂ ਲੈ ਕੇ ਆਵੇ, ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੋਹੜੀ ਦੀਆਂ ਮੁਬਾਰਕਾਂ!


Sunder mundere ho!
Tera kaun vicaharaa ho!
Dullah bhatti walla ho!
Dullhe di dhee vyayae ho!


Ser shakkar payee ho!
Kudi da laal pathaka ho!
Kudi da saalu paatha ho!
Salu kaun samete ho!..
Lohri Mubarak


Mithaa gurh te vich mil gya,
Tiludi patang te khil geya,
Dilhar pal sukh te har vele,
Shantii pao
Rabb agge dua tusi Lohri,
Khushiyaan naal manaao!
HAPPY LOHRI


Mere vallo tuhanu
Te tuhade saare parivaar nu
LOHRI diyan bahut bahut vadhayian
Phir aa gayi bhangre d vari,
Lohri manaun d karo Taiyari,
Agg de kol saare aao,
Sundariye Mundariye jor naal gao!!


Lohri di vadhaiyaan!
Mere vallo tuhanu te tuhade saare parivaar nu,
Lohri diyan bahut bahut vadhayian

ਉਮੀਦ ਹੈ ਕਿ ਲੋਹੜੀ ਦੀ ਅੱਗ ਸਾਰੇ ਦੁੱਖਾਂ ਦੇ ਪਲਾਂ ਨੂੰ ਸਾੜ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਖੁਸ਼ੀ ਅਤੇ ਨਿੱਘ ਦੇ ਪਲ ਦਿੰਦੀ ਹੈ। ਲੋਹੜੀ ਦੀਆਂ 2022 ਦੀਆਂ ਮੁਬਾਰਕਾਂ!

ਆਪੇ ਦੁਖੋਂ ਕੋ ਜਲ ਦੇ, ਲੋਹੜੀ ਕੀ ਆ। ਆਗ ਕੀ ਰੋਸ਼ਨੀ, ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਆਪਕੀ ਮੈਂ ਉਜਲੇ ਭਰ ਦੇ। ਆਪ ਕੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਕੋ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ਮਈ ਕਰ ਦੇ, ਲੋਹੜੀ ਕਾ ਪ੍ਰਕਾਸ਼। ਜੈਸੇ ਜੈਸੇ ਲੋਹੜੀ ਕੀ ਆਗ ਤੇਜ ਹੋ, ਹਮਾਰੇ ਦੁਖੋਂ ਕਾ ਅੰਤ ਹੋ ਵੈਸੇ।

ਖੁਸ਼ੀਆਂ ਆਈਆਂ ਆਪ ਕੇ ਜੀਵਨ ਮੈਂ ਹਰਦਮ। ਲੋਹੜੀ ਕੀ ਆਗ ਮੈਂ ਦੇਹਾਂ ਹੋ ਸਾਰੇ ਗਮ। ਲੋਹੜੀ ਮੁਬਾਰਕ !!

ਲੋਹੜੀ, ਮੁਬਾਰਕ!! ਤੁਹਾਡੀਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਮਨੋਕਾਮਨਾਵਾਂ ਪੂਰੀਆਂ ਹੋਣ ਅਤੇ ਤੁਸੀਂ ਜੋ ਵੀ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਉਸ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰੋ। ਆਪਣੇ ਦਿਨ ਦਾ ਆਨੰਦ ਮਾਣੋ ਅਤੇ ਲੋਹੜੀ ਫਾਇਰ ਰੇਵਰੀ, ਪੌਪਕਾਰਨ ਅਤੇ ਮੂੰਗਫਲੀ ਨੂੰ ਪਾਉਣਾ ਨਾ ਭੁੱਲੋ। ਇਹ ਯਕੀਨੀ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਿਸਮਤ ਲਿਆਏਗਾ!

ਇਹ ਤੁਹਾਡੇ ਪੋਤੇ ਦੀ ਪਹਿਲੀ ਲੋਹੜੀ ਹੋਣ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ, ਅਤੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਹ ਜਾਣ ਕੇ ਖੁਸ਼ੀ ਹੋਵੇਗੀ ਕਿ ਅਸੀਂ ਤੁਹਾਡੇ ਨਾਲ ਸ਼ਾਮਲ ਹੋਣ ਜਾ ਰਹੇ ਹਾਂ। ਤਿੰਨ ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ, ਅਸੀਂ ਇੱਕ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਪਾਰਟੀ ਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧ ਕਰਨ ਲਈ ਆਵਾਂਗੇ।

ਹੈਪੀ ਲੋਹੜੀ ਵੇਖੇਆ ਸਦਾ ਯਾਰੀ ਸਵਾਰੇ ਹੀ ਵਿਸ਼ ਕਰਨ ਦੀ ਤੁਹਾਦੀ ਹੈ ਵਾਰੀ ਸਵਾਰੇ ਹੀ ਵਿਸ਼ ਮੇਰੀ ਇਹਨੂੰ ਕਹਿਂਦੇ ਨੇ ਹੁਸ਼ਿਆਰੀ ਮੇਰੀ ਇੱਛਾ ਕਰਨ

ਸਰਦਾਰੀ ਕੀ ਥਰਥਰਾਹਤ ਮੈਂ, ਮੂੰਗਫਲੀ, ਲੋਹੜੀ ਮੁਬਾਰਕ ਹੋ ਆਪਕੋ ਦੋਸਤੀ ਅਤੇ ਰਿਸ਼ਤੇ ਕੀ ਗਰਮਾਹਟ ਕੇ ਸਾਥ, ਰੇਵਾੜੀ ਅਤੇ ਗੁਰ ਕੀ ਮਿਠਾਸ ਦਾ ਸਾਥ।

ਅਜ ਦਿਨ ਛੋਟਾ ਤੇ ਰਾਤ ਵਦੀ ਲੰਮੀ ਏ ਕਹੰਦੇ ਨੇ ਸਨਮ ਲੋਹੜੀ ਦੀ ਅੱਗ ਵਾਲੀ ਹੋਇ ਹੈ ਏਹ ਜੋ ਪੂਰੀ ਰੀਵਰੀ ਤੇ ਮੁੰਗਫਲੀ ਨੇ ਤੇਰਾ ਹੱਥ ਲਗਦਿਆੰ ਮਹਿਕ ਗਏ ਨੇ।

ਮੁਬਾਰਕ ਹੋਵੇ ਤੁਹਾਨੁ ਏਹ ਲੋਹੜੀ ਦਾ ਤਿਓਹਾਰ!!! ਗੁਰ ਦੀ ਮਿਠਾਸ,ਤੇ ਮੁੰਗਫਲੀ ਦੀ ਖੁਸ਼ਬੂ ਮੱਕੀ ਦੀ ਰੋਟੀ ਤੇ ਸਰਸੋਂ ਦਾ ਸਾਗ, ਦਿਲ ਦੀ ਖੁਸ਼ੀ ਤੇ ਅਪਣੀਆਂ ਦਾ ਪਿਆਰ

ਉਮੀਦ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀਂ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਖੁਸ਼ੀਆਂ ਭਰੇ ਪਲਾਂ ਦਾ ਆਨੰਦ ਮਾਣੋਗੇ ਅਤੇ ਖੁਸ਼ ਹੋਵੋ ਜਦੋਂ ਤੁਸੀਂ ਬੋਨਫਾਇਰ ਦੇ ਆਲੇ-ਦੁਆਲੇ ਆਪਣੇ ਅਤੇ ਤੁਹਾਡੇ ਪਰਿਵਾਰ ਲਈ ਗਾਉਂਦੇ ਅਤੇ ਨੱਚਦੇ ਹੋ, ਹੈਪੀ ਲੋਹੜੀ 2022!!

ਲੋਹੜੀ ਦੀ ਅੱਗ ਉਦਾਸੀ ਦੇ ਸਾਰੇ ਪਲਾਂ ਨੂੰ ਸਾੜ ਦੇਵੇ ਅਤੇ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਖੁਸ਼ੀ, ਖੁਸ਼ੀ ਅਤੇ ਪਿਆਰ ਦਾ ਨਿੱਘ ਲਿਆਵੇ।

ਲੋਹੜੀ ਦੇ ਇਸ ਸ਼ੁਭ ਦਿਨ ‘ਤੇ, ਮੈਂ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਸ਼ਾਂਤੀ ਅਤੇ ਖੁਸ਼ਹਾਲੀ ਦੀ ਕਾਮਨਾ ਕਰਦਾ ਹਾਂ, ਇਹ ਤਿਉਹਾਰ ਤੁਹਾਡੇ ਅਤੇ ਤੁਹਾਡੇ ਪਰਿਵਾਰ ਲਈ ਬੇਅੰਤ ਖੁਸ਼ੀਆਂ ਲੈ ਕੇ ਆਵੇ, ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੋਹੜੀ ਦੀਆਂ ਸ਼ੁਭਕਾਮਨਾਵਾਂ!

ਵਾਢੀ ਦੇ ਇਸ ਸੀਜ਼ਨ ਦੀ ਕਾਮਨਾ ਕਰਨਾ ਤੁਹਾਡੇ ਅਤੇ ਤੁਹਾਡੇ ਪਰਿਵਾਰ ਲਈ ਖੁਸ਼ਹਾਲੀ ਅਤੇ ਖੁਸ਼ਹਾਲੀ ਲਿਆਉਂਦਾ ਹੈ। ਲੋਹੜੀ ਮੁਬਾਰਕ! Happy Lohri wishes in punjabi

ਜੋਸ਼ ਅਤੇ ਉਤਸ਼ਾਹ ਦਾ ਇਹ ਤਿਉਹਾਰ ਤੁਹਾਡੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀ ਊਰਜਾ ਅਤੇ ਉਤਸ਼ਾਹ ਨਾਲ ਭਰ ਦੇਵੇ। ਲੋਹੜੀ ਮੁਬਾਰਕ!

ਇਸ ਲੋਹੜੀ ਦਾ ਪੂਰਾ ਆਨੰਦ ਮਾਣੋ ਅਤੇ ਪਿਆਰ ਦੀ ਮਿਠਾਸ ਨੂੰ ਮੁੜ ਲਿਖਣ, ਮੂੰਗਫਲੀ, ਅਤੇ ਪੌਪਕੌਰਨ ਨਾਲ ਸਾਰਿਆਂ ਨਾਲ ਸਾਂਝਾ ਕਰੋ ਅਤੇ ਖੁਸ਼ੀਆਂ ਫੈਲਾਓ।

ਜੇ ਸਰਦੀ ਆਉਂਦੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਕੀ ਬਸੰਤ ਬਹੁਤ ਪਿੱਛੇ ਰਹਿ ਸਕਦੀ ਹੈ? ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਸਰਦੀਆਂ ਦਾ ਮੌਸਮ ਖਤਮ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ, ਆਓ ਇਸ ਪਵਿੱਤਰ ਤਿਉਹਾਰ ਮੌਕੇ ਬਸੰਤ ਰੁੱਤ ਦਾ ਖੁਸ਼ੀ, ਖੁਸ਼ੀ ਅਤੇ ਤਾਜ਼ਗੀ ਨਾਲ ਸਵਾਗਤ ਕਰੀਏ। ਇੱਥੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਅਤੇ ਤੁਹਾਡੇ ਪਿਆਰਿਆਂ ਨੂੰ ਲੋਹੜੀ ਦੀਆਂ ਬਹੁਤ ਬਹੁਤ ਮੁਬਾਰਕਾਂ!

ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਲੋਹੜੀ ਦਾ ਤਿਉਹਾਰ ਇੱਕ ਨਵੇਂ ਸਾਲ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਨੂੰ ਦਰਸਾਉਂਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ, ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਅਤੇ ਆਪਣੇ ਆਲੇ ਦੁਆਲੇ ਦੇ ਹੋਰਾਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਨਵੀਂ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਦੇ ਨਾਲ ਖੋਜ ਕਰਨ ਅਤੇ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨ ਦਾ ਇੱਕ ਹੋਰ ਮੌਕਾ ਦਿਓ। ਤੁਹਾਨੂੰ ਅਤੇ ਤੁਹਾਡੇ ਪਿਆਰਿਆਂ ਨੂੰ ਲੋਹੜੀ ਦੀਆਂ ਮੁਬਾਰਕਾਂ!

ਇਸ ਲੋਹੜੀ ਮੌਕੇ ਪੰਜਾਬੀ ਸੰਗੀਤ ਵਜਾਓ ਅਤੇ ਢੋਲ ਦੀਆਂ ਧੁਨਾਂ ‘ਤੇ ਡਾਂਸ ਕਰੋ ਅਤੇ ਸਾਰਿਆਂ ਨਾਲ ਮੁਸਕਰਾਹਟ ਅਤੇ ਹਾਸੇ ਸਾਂਝੇ ਕਰੋ।

Makar Sankranti wishes in Hindi

मीठे गुड़ में मिल गए तिल, उड़ी पतंग और खिल गए दिल,हर पल सुख और हर दिन शांति, आप सबके लिए लाए मकर सक्रांति !

सूर्य का त्योहार लाएगा आपके जीवन में ज्ञान और खुशियों का भंडारमुबारक हो आपको मकर संक्रांति का त्योहार!

Makar Sankranti wishes in Hindi

सूरज की राशि बदलेगी बहुतों की किस्मत बदलेगी,यह साल का पहला पर्व होगा, जो बस खुशियों से भरा होगा! हैप्पी संक्रांति!

तन में मस्ती मन में उमंग,देकर सबको अपनापन गुड़ में जैसे मीठापन।होकर साथ हम उड़ाएं पतंगऔर भर लें आकाश में अपने रंग।

मूंगफली की खुशबू और गुड़ की मिठासदिलों में खुशी और अपनों का प्यारशुभ हो आपको मकर संक्रांति का त्यौहार।

काट ना सके कभी कोई पतंग आपकी,टूटे ना कभी डोर विश्वास की,छू लो आप ज़िन्दगी की सारी कामयाबी,जैसे पतंग छूती है ऊँचाइयाँ आसमान की।मकर सक्रांति की हार्दिक शुभ कामनायें।

मंदिर की घंटी, आरती की थाली,नदी के किनारे सूरज की लाली,जिंदगी में आए खुशियों की बहार,आपकी मुबारक हो संक्रांत का त्योहार।हैप्पी मकर संक्रांति।

पतंगों की तरह आकाश में बुलंदी पायें औरअपनी मेहनत की डोर से उस बुलंदी को संभाल कर रखें ।सूरज की पहली किरण के साथ आपकोमकर संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएं !

पुराना साल जाता है नया साल आता है साथ आप संक्रांति की खुशिया लता है भगवान आप को वो खुशिया दे जो आप का दिल चाहता है

सभी लोगों को मिले सन्मति, आज है मकर संक्रांति, मित्रों उठ गया है दिनकर, चलो उडाये पतंग मिलकर

Mantra of success – Krishna Mantra

Krishna mantra is one of the most important and simple mantras available. Chanting this mantra removes hurdle from one’s life. This is surely a mantra of success. The Krishna Mantra praises two incarnations of Lord Vishnu, Lord Krishna and Lord Ram, respectively.

 The Benefits of Krishna Mantra

  • This mantra removes confusion and fear in one’s life. It enhances confidence and courage.
  • The Krishna Mantra helps to bring out peace and tranquility in the disciple’s life and the overall household when chanted properly as well as consistently.
  • It helps cure all kinds of diseases and promotes well being of an individual.
  • The Krishna Mantra is also known for bringing out a positive outlook in one’s state of mind by eliminating the negative vibrations from their mind.
  • It enhances the knowledge and skills of students, working professionals and business people giving way to professional growth and success.
  • Recitation of Krishna Mantra in this Kalyug is considered to be a great purifying act towards attaining peace, when the world around you is burdened by sins.
  • This mantra bestows spiritual solace. It is also said that these Mantras recited with pure devotion might lead one towards experiencing spiritual connection with Krishna or God.

The Krishna Mantra awakens the soul to its spiritual reality. The ideal time to chant this Mantra is between 4 am to 6 am , after taking an early morning bath. Sitting in front of Lord Krishna’s picture or idol and chanting the Mantra in multiples of 108 with the help of a Tulsi Mala yields better results. Make sure the movement of the rosary is in clockwise direction and you would attain spiritual peace after continuing it regularly.

Om Namo Bhagwate Vasudevaya

Another great mantra of Lord Vishnu is Om Namo Bhagwate Vasudevaya. The great Prahlad chanted this mantra whole his life and this is when Narsingh incarnation of Lord Vishnu took place.

Shri Krishna beej mantra

Another important mantra for Lord Krishna is the beej mantra. It is said that this mantra has the power to remove all obstacles as it is the beej mantra.

Ramayana – The legend of prince Rama

Who wrote Ramayana

Ramayana was first written by great sage Valmiki. There is an interesting story behind this. Valmiki was earlier a robber known as Angulimaal. After meeting Sage Narada, he became a sage known Valmiki. He wrote this great epic. Later, many great poets have penned this great epic, Tulsidas, Kamban are few of them.

When was Ramayana written?

Valmiki wrote The Ramayana around 7000 years ago. The language of this epic is Sanskrit. It has about 24 thousand shlokas. The entire epic of Ramayana consists of about 480,002 words.

Ramayana katha or Ramayana story

Ramayana story revolves around its main character, Lord Rama. He is seventh incarnation of Lord Vishnu. Ramayana story is often told in seven chapters, this chapters are namely Bal Kand, Ayodhya Kand, Aranya Kanda, Kishkindha Kand, Sunder Kanda, Yuddha Kanda and Uttar Kanda.

Rama born to King Dashratha, he was eldest among the four sons. His brothers were Lakhsman, Bharat and Shatrughana. Sage Vasistha taught all the four brothers. Lord Rama and his brothers shown lot of talent in their formative years and they helped Sage Vasistha later on.

Marriage of Lord Rama and his brothers

Raja Janak organized a swayamvara to find a suitable groom for his daughter Sita. He put forth a difficult condition. Rama easily satisfied this condition and married Devi Sita. His brothers also found their respective life partners as a result of swayamvara.

Exile of Rama

As luck would have it, Rama left Ayodha and went to forest with his wife Sita and brother Lakshman. Due to a boon to Kaikeyi by Dashratha, this incident happened.

Adduction of Sita

While in forest, Ravana, the demon king abducted Sita. Rama found his wife with help of Sugriva and Lord Hanuma, an ardent devotee of Lord. Hanumana searched Sita by going to Lanka and in the process, he destroyed Lanka.

Ramayana : The legend of Prince Rama
Abduction of Sita in movie Ramayana: The Legend of Prince Rama

Killing of Ravana

Finally, Rama kills Ravana with help of Sugriva’s monkey Army and gets back his wife Sita. This is the story of Ramayana, The Legend of Prince Rama.

The movie Ramayana – The legend to Prince Rama

Note: A movie with the same name Ramayana, The Legend of Prince Rama, made in 1992 and available for download at various sites.

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Kunti in Mahabharata

Kunti, the mother of Pandavas is often looked at as a character which people do not like to follow. Reason being two fold, first, she had a son before she was married and second, she abandoned her son Karna who later faced many hardships in life.

But hold on, do you know, she is one of the Panchkanyas or five ladies, who are revered in Hindu religion. This means that remembering these five ladies in morning takes away all the sins. Also remember that Sita does not belong to Panchkanyas. There must be something about Kunti then. Let us know more about her.

Kunti’s birth

She was born to Shurasena, a yadava king as Pritha ( This is the reason, Arjun is also called Parth). She was later raised by her uncle Kuntibhoja and hence she was renamed as Kunti.

Sage Durvasa and powerful mantra

Once Maharshi Duravasa stayed at Kunti’s place for a month. During this period, Princess Kunti served him like a daughter serve to her father. By seeing respect, dedication, faith, devotion and obedience of princess Kunti, Maharshi Durvasa given her one boon and one mantra.

According to the boon of Maharshi Durvasa, princess Kunti can invoke the god by reciting mantra and get beget a son.

Kunti calls Surya (The Sun God) and birth of Karna

A curious Kunti could not resist the temptation to try out her newly learned mantra, and invoked Surya – the Sun God, and lo and behold, Surya appeared and blessed her with a son, Karna. She had to let go of her son, because she was unmarried at that point of time.

Kunti invokes Surya (Sun God) out of curiosity

Marriage of Kunti and birth of sons

Kunti chose Pandu as her husband in her swayamvar. Pandu could not have sons because of a curse from Sage Kindam. To overcome this, she uses the Durvasa boon to have sons from various gods. Using this, she had three sons, one from Dharmraja called Yudhishthira, one from Vayu called Bhima and one from Indra called Arjuna. Kunti also shared the mantra to Madri who invoked the celestial physician brothers Ashwini Kumaras who blessed her with two sons Nakul and Sahdeva. As fate would have it, Pandu died under tragic circumstances and Madri chose to depart with him, Kunti bore the responsibility of raising sons of Pandu.

Hardship, Exile and marriage of Pandavas

Thus started the long journey of injustice by Dhritrashtra and Duryodhana on Pandavas. Pandavas were sent to exile by Dhritrashtra. Upon coming from exile, there was a plot to kill them in the house of lacquer. Kunti endured everything. There is also a controversial incident of Pandavas wedding to Draupadi. Kunti is sometimes referred as the reason for Draupadi having five husbands. Nothing could be farther to truth.

Kunti meeting Karna

This is an important event of Mahabharata when Kunti meets her first born, Karna. The love that Kunti had for her sons, the five Pandavas, probably made her realise the unfair treatment that she meted out to her first-born Karna. While one does understand her reasons for giving up a son born out of wedlock, given the social stigma it carried, it is difficult to understand or justify her meeting Karna, on the eve of the great war to divulge the secret of his birth and when he refused to move to the Pandava army, to extract the promise of not killing the Pandava brothers. Karna promised to do so with the exception of sparing the life of Arjuna and asked Kunti to keep the secret intact until the end of the war. This is a blemish which Kunti has to carry.

Death of Karna and Curse of Yudhisthira

Kunti was unconsolable when Karna was killed in the war of Mahabharat. Pandavas came to know that he was their elder brother which make them sad and angry. Yudhisthira cursed Kunti and all women that they shall be unable to keep any secret anymore.

Kunti was sad when Karna died

Kunti goes to forest with Gandhari and Dhritrashtra

When after the all-destroying war ends after 18 days and killed all of the Kaurava princes and all sons of Pandavas leaving behind just twelve warriors from both sides. Kunti decides to accompany Dhritrashtra and Gandhari to forest sacrificing the comforts of the palace. She was questioned by her sons on her decision. She explains that the war was fought to get them justice which is achieved. Now she needed to serve penance for all the violence leading to the deaths of so many people.