Monthly Archives: October 2015

Nandi and Lord Shiva

Kashi Vishwanath Jyotirlinga – Lord Shiva

Kashi Vishwanath (Jyotirlinga) Temple of Lord Shiva

There are twelve jyotirlinga’s of Lord Shiva and Kashi Vishwanath Temple holds a special place among these. This temple is present in the holy city of Varanasi, on the banks of The Ganges. The main deity is known by the name Vishwanatha or Vishveshvara meaning Ruler of The Universe. The Vishwanath Jyotirlinga has a very special and unique significance in the spiritual history of India. It is said that the merits earned by the darshan of other jyotirlinga scattered in various parts of India accrue to a devotee by a single visit to Kashi Vishwanath Temple. Kashi nagar is so great that even if the universe is to be destroyed in Pralaya, it would remain intact. Dandapani and Kalabhairav guard this city. They stay there forever. On the Ganga banks eighty four bathing ghats are located. There are also several teerthkundas. They have been there right from the times of Vedas. According to some legends, Lord Shiva had lived at Kashi for quite some time on his arrival there after the Daksha Yagna incident.

Kashi Vishwanath temple witnesses important events, some of them are enumerated below.

Lord Shiva - Jyotirlinga at Kashi

Lord Shiva – Jyotirlinga at Kashi

Gauna of Devi Parvati

Lord Shiva married Goddess Parvati on Mahashivratri and gauna (a ritual associated with consummation of marriage) was performed on Rangbhari Ekadashi. This auspicious occasion is celebrated by the residents of Kashi in grand style.

As per tradition, devotees carried the idols of Lord Shiva and Goddess Parvati in a ‘palaki’ from the house of former mahant of Kashi Vishwanath Temple. Blowing conch, damru and other musical instruments, the devotees went to the sanctum sanctorum of Kashi Vishwanath Temple and offered gulal and rose petals to the deities.

 Importance of Manikarnika Ghat

The Manikarnika Ghat on the banks of Ganges near to the Kashi Vishwanath Temple is considered as a Shakti Peetha, a revered place of worship for the Shaktism sect. The mythology of Daksha Yaga, a Shaivite literature is considered as an important literature which is the story about the origin of Shakti Peethas.It is said that Shiva came to the Kashi Vishwanath Shrine through Manikarnika after the death of Sati Devi.

Due to the immense popularity and holiness of Kashi Vishwanath temple, hundreds of temples across India have been built in the same architectural style. Many legends record that the true devotee achieves freedom from death and saṃsāra by the worship of Shiva, Shiva’s devotees on death being directly taken to his abode on Mount Kailash by his messengers and not to Yama. The superiority of Shiva and his victory over his own nature—Shiva is himself identified with death—is also stated. There is a popular belief that Shiva himself blows the mantra of salvation into the ears of people who die naturally at the Vishwanath temple.

Maa Durga

Navratri story in Hindi

देवी दुर्गा – शक्ति का अवतार

हिंदू मान्यतानुसार देवी दुर्गा को शक्ति का अवतार माना जाता है। दुर्गा जी हिन्दू धर्म की देवी हैं। इन्हें आदिशक्ति के नाम से भी जाना जाता है। इनके नौ अन्य रूप है जिनकी पूजा नवरात्रों में की जाती है। माना जाता है कि राक्षसों का संहार करने के लिए देवी पार्वती ने दुर्गा का रूप धारण किया था। दुर्गा जी को तंत्र-मंत्र की साधना करने वाले साधक आदि शक्ति और परमदेवी मानते हैं। दुर्गा जी के विषय में हिन्दू धर्म में कई कथाओं का वर्णन है.

हिन्दू धर्मानुसार असुरों के अत्याचार से दुखी होकर देवताओं ने जगज्जननी देवी पार्वती का आवाहन किया। देवताओं की पुकार पर देवी प्रकट हुईं तथा उन्हें दैत्यों के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने की बात कही। तब अपने भक्तों की रक्षा के लिए दुर्गा का रूप धारण किया और राक्षसों का अंत कर दिया। तब से ही दुर्गा को युद्ध की देवी के रूप में जाना जाने लगा।

Goddess Durga emergence

Goddess Durga emergence

दुर्गा जी, देवी पार्वती का ही रूप है इसलिए इनका भी निवास स्थान कैलाश है। इनका वाहन शेर है। इनके आठ हाथ हैं। इनके एक तरफ के तीन हाथों में तलवार, चक्र और गदा है तथा दूसरी तरफ के तीन हाथों में कमल त्रिशूल और धनुष है। इनके अन्य एक हाथ में शंख और एक हाथ वर मुद्रा में हैं।

राम जी ने भी रखा था नवरात्र व्रत

मान्यता है कि शारदीय नवरात्र में महाशक्ति की पूजा कर श्रीराम ने अपनी खोई हुई शक्ति पाई। इसलिए इस समय आदिशक्ति की आराधना पर विशेष बल दिया गया है। मार्कंडेय पुराण के अनुसार, ‘दुर्गा सप्तशती’ में स्वयं भगवती ने इस समय शक्ति-पूजा को महापूजा बताया है।

किष्किंधा में चिंतित श्रीराम

रावण ने सीता का हरण कर लिया, जिससे श्रीराम दुखी और चिंतित थे। किष्किंधा पर्वत पर वे लक्ष्मण के साथ रावण को पराजित करने की योजना बना रहे थे। उनकी सहायता के लिए उसी समय देवर्षि नारद वहां पहुंचे। श्रीराम को दुखी देखकर देवर्षि बोले, ‘राघव! आप साधारण लोगों की भांति दुखी क्यों हैं? दुष्ट रावण ने सीता का अपहरण कर लिया है, क्योंकि वह अपने सिर पर मंडराती हुई मृत्यु के प्रति अनजान है।

महाशक्ति का परिचय

नारद ने संपूर्ण सृष्टि का संचालन करने वाली उस महाशक्ति का परिचय राम को देते हुए बताया कि वे सभी जगह विराजमान रहती हैं। उनकी कृपा से ही समस्त कामनाएं पूर्ण होती है। आराधना किए जाने पर भक्तों के दुखों को दूर करना उनका स्वाभाविक गुण है। त्रिदेव-ब्रह्मा, विष्णु, महेश उनकी दी गई शक्ति से सृष्टि का निर्माण, पालन और संहार करते है।

नवरात्र पूजा का विधान

देवर्षि नारद ने राम को नवरात्र पूजा की विधि बताई कि समतल भूमि पर एक सिंहासन रखकर उस पर भगवती जगदंबा को विराजमान कर दें। नौ दिनों तक उपवास रखते हुए उनकी आराधना करें। पूजा विधिपूर्वक होनी चाहिए। आप के इस अनुष्ठान का मैं आचार्य बनूंगा। राम ने नारद के निर्देश पर एक उत्तम सिंहासन बनवाया और उस पर कल्याणमयी भगवती जगदंबा की मूर्ति विराजमान की। श्रीराम ने नौ दिनों तक उपवास करते हुए देवी-पूजा के सभी नियमों का पालन भी किया।

Maa Durga

Maa Durga

जगदंबा का वरदान

मान्यता है कि आश्विन मास के शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि की आधी रात में श्रीराम और लक्ष्मण के समक्ष भगवती महाशक्ति प्रकट हो गई। देवी उस समय सिंह पर बैठी हुई थीं। भगवती ने प्रसन्न-मुद्रा में कहा- ‘श्रीराम! मैं आपके व्रत से संतुष्ट हूं।

जो आपके मन में है, वह मुझसे मांग लें। सभी जानते हैं कि रावण-वध के लिए ही आपने पृथ्वी पर मनुष्य के रूप में अवतार लिया है। आप भगवान विष्णु के अंश से प्रकट हुए हैं और लक्ष्मण शेषनाग के अवतार हैं। सभी वानर देवताओं के ही अंश हैं, जो युद्ध में आपके सहायक होंगे। इन सबमें मेरी शक्ति निहित है। आप अवश्य रावण का वध कर सकेंगे। अवतार का प्रयोजन पूर्ण हो जाने के बाद आप अपने परमधाम चले जाएंगे। इस प्रकार श्रीराम के शारदीय नवरात्र-व्रत से प्रसन्न भगवती उन्हे मनोवांछित वर देकर अंतर्धान हो गई।

Rama and Ravana - The Ramayana

Rama and Ravana – The Ramayana

 

Shiva and Sati

Sati Devi story in hindi – सती

शक्तिपीठ  – माता की कथा

आदि सतयुग के राजा दक्ष की पुत्री पार्वती माता को शक्ति कहा जाता है। यह शक्ति शब्द बिगड़कर ‘सती’ हो गया। पार्वती नाम इसलिए पड़ा की वह पर्वतराज अर्थात् पर्वतों के राजा की पुत्र थी। राजकुमारी थी। लेकिन वह भस्म रमाने वाले योगी शिव के प्रेम में पड़ गई। शिव के कारण ही उनका नाम शक्ति हो गया। पिता की ‍अनिच्छा से उन्होंने हिमालय के इलाके में ही रहने वाले योगी शिव से विवाह कर लिया।

एक यज्ञ में जब दक्ष ने पार्वती (शक्ति) और शिव को न्यौता नहीं दिया, फिर भी पार्वती शिव के मना करने के बावजूद अपने पिता के यज्ञ में पहुंच गई, लेकिन दक्ष ने शिव के विषय में सती के सामने ही अपमानजनक बातें कही। पार्वती को यह सब बरदाश्त नहीं हुआ और वहीं यज्ञ कुंड में कूद कर अपने प्राण त्याग दिए।

Sati and Shiva

Sati and Shiva

यह खबर सुनते ही शिव ने अपने सेनापति वीरभद्र को भेजा, जिसने दक्ष का सिर काट दिया। इसके बाद दुखी होकर सती के शरीर को अपने सिर पर धारण कर शिव ‍क्रोधित हो धरती पर घूमते रहे। इस दौरान जहां-जहां सती के शरीर के अंग या आभूषण गिरे वहां बाद में शक्तिपीठ निर्मित किए गए। जहां पर जो अंग या आभूषण गिरा उस शक्तिपीठ का नाम वह हो गया। इसका यह मतलब नहीं कि अनेक माताएं हो गई।

Shiva and Sati

Shiva and Sati

Sati and Shakti peeths

Jwalamukhi Temple – Sati Shakti Peeth

Articles related to Shakti Peeth

Why only Coconut and Banana are offered in the temples ?

In Hindu traditions, one invariably finds customs and rituals. On surface, they seem to be innocuous, but dig deeper, and you will find that there is a reason behind everything. Similarly here also, we are looking to find if there is any special reason for offerings of coconut and banana, and indeed, there is a reason for this.

Why only Coconut and Banana 🍌are offered in the temples ?

Coconut and Banana are the only two fruits which are considered to be the “Sacred fruits”. All other fruits are tainted fruits ( partially eaten fruits), meaning other fruits have seeds and which have the capacity to reproduce !

But in the case of coconut, if you eat coconut and throw its outer shell, nothing will grow out of it. If you want to grow a coconut tree, you have to sow the entire coconut itself.

Similarly Banana. If you eat a banana and throw its out sleeves, nothing will grow out of it. Banana tree is grown on its own when a banana plant start giving fruits.

Offering of coconut and banana in temples

Offering of coconut and banana in temples

The outer shell of coconut is the Ahamkara or ego, which one has to break. Once the ego is shed the mind will be as pure as the white tender coconut inside. The Bhavaavesha or Bhakthi will pour like the sweet water in it. The 3 eyes on the top they explain as Satwa, Raja and Tama or Past , Present and Future or Sthoola, Sukshma and Karana Sareera or body etc

Our ancestors had found this reality long ago and they had made it as a system which is still followed religiously.!

Read more about reasons behind untold and unknown rituals of Hindu religion. You will surely know something today.

Seven Important and interesting rituals of Hindu religion and story behind them.

Seven Sacred plants of Hindu Religion.