Category Archives: Navratri

How Raktabija was detroyed by Maa Kali

The story of Raktabija

This interesting story is available in Markendeya purana. According to the eighth chapter of Devi Mahatmya from Markandeya Puran, there was a demon by the name of Raktabija (blood-seed, literally).

Boon from Lord Brahma

He had been given a boon by Lord Brahma that every time a drop of his blood fell on the ground, his strength would increase many times, by his blood creating more of his own. Having received the boon, he had made the life of people on earth miserable.

He was,causing a great deal of trouble with people and gods alike but even worse was his ability to produce more demons every time a drop of his blood spilt to the ground.

Emergence of Kali and slaying of demon

So whenever he was attacked and harmed, more Raktabijas were born and fought the attacker.The gods decided to work together and combine all of their shakti or divine energy and produce one super being that could destroy Raktabija; the result was Kali.

Maa Kali’s most common pose in paintings is in her most fearsome guise as the slayer of demons, where she stands or dances with one foot on a collapsed Shiva and holds a severed head. She wears a skirt of severed human arms, a necklace of decapitated heads, and earrings of dead children, and she often has a terrifying expression with a lolling tongue which drips blood.

Maa Kali and Raktabija

Maa Kali and Raktabija

Kali in her fierce form eliminated the huge army and swallowed all of them, which left Raktabija all alone. She then struck the demon and before his blood spilled on the ground, she stretched her huge tongue and devoured all the blood ensuring that not a drop fell on the ground. This way, Raktabija was drained of all the blood and life and soon he was nothing but a corpse.

There is another story of Kali and Shiva when Lord Shiva made an angry Goddess Kali calm

 

 

Vijaya Dashmi Mantra

Famous Shlokas of Durga Saptashati

Important Shlokas from Durga Saptashati.

Durga is omnipresent as the embodiment of power, intelligence, peace, wealth, morality etc.

Chaya rupena sansthita - Maa Durga Shloka

Chaya rupena sansthita – Maa Durga Shlokaus

या देवी सर्वभुतेषु छायारूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः 

Yaa Devii Sarva-Bhutessu Chaayaa-Ruupenna Samsthitaa |
Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namo Namah ||

Shakti Rupena Sansthita

Shakti Rupena Sansthita

या देवी सर्वभुतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।

Yaa Devii Sarva-Bhutessu Shakti-Ruupenna Samsthitaa |
Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namo Namah ||

Lakshmi rupena sansthita

Lakshmi rupena sansthita

या देवी सर्वभुतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

Yaa Devii Sarva-Bhutessu Lakssmii-Ruupenna Samsthitaa |
Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namo Namah ||

Buddhi rupena sansthita

Buddhi rupena sansthita

या देवी सर्वभुतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

Yaa Devii Sarva-Bhutessu Buddhi-Ruupenna Samsthitaa |
Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namo Namah ||

Kanti rupena sansthita

Kanti rupena sansthita

या देवी सर्वभुतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

Yaa Devii Sarva-Bhutessu Kaanti-Ruupenna Samsthitaa |
Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namo Namah ||

Shraddha rupena sansthita

Shraddha rupena sansthita

या देवी सर्वभुतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

Yaa Devii Sarva-Bhutessu Shraddhaa-Ruupenna Samsthitaa |
Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namo Namah ||

Kshanti rupena sansthita

Kshanti rupena sansthita

या देवी सर्वभुतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

Yaa Devii Sarva-Bhutessu Kssaanti-Ruupenna Samsthitaa |
Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namo Namah ||

Daya rupena sansthita

Daya rupena sansthita

या देवी सर्वभुतेषु दयारूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
Yaa Devii Sarva-Bhutessu Dayaa-Ruupenna Samsthitaa |
Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namo Namah ||

Vijaya Dashmi Mantra

Vijaya Dashmi Mantra

Namo Namo Durge Sukh karni – Goddess Durga shloka

Namo Namo Durge Sukh karni

Namo Namo Durge Sukh karni

Ya Devi Sarvabhuteshu – The shloka of Goddess Durga

To the Divine Goddess who resides in all existence in the form of energy.

Yaa Devii Sarva-Bhutessu Shakti-Ruupenna Samsthitaa |
Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namo Namah ||12||

To that Devi Who in All Beings is Abiding in the Form of Power,
Salutations to Her, Salutations to Her, Salutations to Her, Salutations again and again.

Ya Devi Sarvabhuteshu

Ya Devi Sarvabhuteshu

The killing of Dhumralochana

The killing of Dhumralochana

Third day of Navratri is associated with killing of Dhumralochana who was the commander of Shumbh.

Shumbh sent Devi a message that he wanted to marry her. The Goddess duly rejected this offer. The messenger then went back to Shumbh and narrated the incident to Devi Durgaa.

Shumbh became very furious and instructed Dhumralochan to bring her by force. Dhumralochan went to Goddess Bhagvati accompanied by 60,000 demons. Initially, he requested her to come along with him. He also threatened to take her forcibly if she did not accept her proposal. Goddess Bhagvati refused to go along with him. Dhumralochan angrily ran towards her. The Goddess made a loud roar as a result of which, Dhumralochan’s body was reduced to ashes. After his death, Dhumralochan’s army attacked Goddess Bhagvati. The mount of the Goddess- Simha killed all the demons. When Shumbh got the news of Dhumralochan’s death, his anger knew no bounds. He instructed Chand and Mund to go and bring Goddess Bhagvati after capturing her.

Dhumralochana Vadha

Dhumralochana Vadha

The story in hindi is as follows:

शुम्भ और निशुम्भ दैत्यों के राजा का सेनापति धूम्रलोचन था . हिमालय पर हुंकार भर रही महा सुंदरी देवी ने जब शुम्भ से विवाह का प्रस्ताव ठुकरा दिया तब धूम्रलोचन को कहा गया की उस देवी के केश पकड़कर घसीटते हुए लाया जाये और यदि इस बीच कोई भी देवता, यक्ष या गंधर्व बाधा बने तो उन्हें मार दिया जाये |

आज्ञा पाकर धूम्रलोचन साठ हजार राक्षसों की सेना लेकर वहां पहुंचा और देवी को ललकारने लगा की तुम सीधे सीधे मेरे साथ चलो अन्यथा मैं तुम्हे केश पकड़ कर घसीटता हुआ ले चलूंगा | देवी ने कहा आगे बढ़ो और अपना बल दिखाओ | जैसे ही अहंकार में भरा धूम्रलोचन देवी की तरफ बढ़ा , देवी ने हुंकार भरी और पल में ही उसे भस्म कर दिया |

अपने सेनापति की इस तरह दुर्दशा देखर असुर सेना ने एक साथ देवी पर आक्रमण किया | तब देवी की सवारी सिंह असुर सेना पर टूट पड़ा और साथ ही साथ देवी के बाणों और फरसों से देखते ही देखते सम्पूर्ण सेना का संहार कर दिया |

इस तरह माँ ने पर धूम्रलोचन और उसके ६०००० असुर सैनिको का वध किया

Maa Siddhidatri

माँ सिद्धिदात्री – Maa Siddhidatri story in Hindi – Navratri

माँ दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्रपूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधिविधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है। ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है।

देवी सिद्धिदात्री का वाहन सिंह है। वह कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं विधिविधान से नौंवे दिन इस देवी की उपासना करने से सिद्धियां प्राप्त होती हैं। यह अंतिम देवी हैं। इनकी साधना करने से लौकिक और परलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है।

Maa Siddhidatri

Maa Siddhidatri

भगवान शिव ने भी सिद्धिदात्री देवी की कृपा से तमाम सिद्धियां प्राप्त की थीं। इस देवी की कृपा से ही शिवजी का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण शिव अर्द्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए।

मां के चरणों में शरणागत होकर हमें निरंतर नियमनिष्ठ रहकर उपासना करनी चाहिए। इस देवी का स्मरण, ध्यान, पूजन हमें इस संसार की असारता का बोध कराते हैं और अमृत पद की ओर ले जाते हैं।

देवी पुराण में ऐसा उल्लेख मिलता है कि भगवान शंकर ने भी इन्हीं की कृपा से सिद्धियों को प्राप्त किया था। ये कमल पर आसीन हैं और केवल मानव ही नहीं बल्कि सिद्ध, गंधर्व, यक्ष, देवता और असुर सभी इनकी आराधना करते हैं। संसार में सभी वस्तुओं को सहज और सुलभता से प्राप्त करने के लिए नवरात्र के नवें दिन इनकी पूजा की जाती है। इनका स्वरुप मां सरस्वती का भी स्वरुप माना जाता है।

mata-mahagauri

मां महागौरी – Maa Mahagauri story in Hindi – Navratri

महागौरी को भगवान गणेश की माता के रूप में भी जाना जाता है|

नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की आराधना की जाती है। आज के दिन मां की स्तुति से समस्त पापों का नाश होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मां ने कठिन तप कर गौरवर्ण प्राप्त किया था। मां की उत्पत्ति के समय इनकी आयु आठ वर्ष की थी जिस कारण इनका पूजन अष्टमी को किया जाता है। मां अपने भक्तों के लिए अन्नपूर्णा स्वरूप है। आज ही के दिन कन्याओं के पूजन का विधान है। मां धन वैभव, सुख शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं। मां का स्वरूप ब्राह्मण को उज्जवल करने वाला तथा शंख, चन्द्र व कुंद के फूल के समान उज्जवल है। मां वृषभवाहिनी (बैल) शांति स्वरूपा है।

कहा जाता है कि मां ने शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया जिसके बाद उनका शरीर मिटटी ढक गया। आखिरकार भगवान महादेव उन पर प्रसन्न हुए और उन्हें पत्नी होने का आर्शीवाद प्रदान किया। भगवान शंकर ने इनके शरीर को गंगाजल से धोया जिसके बाद मां गौरी का शरीर विद्युत के समान गौर व दैदीप्यमान हो गया। इसी कारण इनका नाम महागौरी पड़ा।

Maa Mahagauri

Maa Mahagauri

महागौरी जी से संबंधित एक अन्य कथा भी प्रचलित है इसके जिसके अनुसार, एक सिंह काफी भूखा था, वह भोजन की तलाश में वहां पहुंचा जहां देवी उमा तपस्या कर रही होती हैं। देवी को देखकर सिंह की भूख बढ़ गयी परंतु वह देवी के तपस्या से उठने का इंतजार करते हुए वहीं बैठ गया। इस इंतजार में वह काफी कमज़ोर हो गया। देवी जब तप से उठी तो सिंह की दशा देखकर उन्हें उस पर बहुत दया आती है और माँ उसे अपना सवारी बना लेती हैं क्योंकि एक प्रकार से उसने भी तपस्या की थी। इसलिए देवी गौरी का वाहन बैल और सिंह दोनों ही हैं।

मां संगीत व गायन से प्रसन्न होती है तथा इनके पूजन में संगीत अवश्य होता है। कहा जाता है कि आज के दिन मां की आराधना सच्चे मन से होता तथा मां के स्वरूप में ही पृथ्वी पर आयी कन्याओं को भोजन करा उनका आर्शीवाद लेने से मां अपने भक्तों को आर्शीवाद अवश्य देती है। हिन्दू धर्म में अष्टiमी के दिन कन्याओं को भोजन कराए जाने की परम्परा है।

माता महागौरी, मां दुर्गा की अष्टम शक्ति है जिसकी आराधना करने से भक्तजनों को जीवन की सही राह का ज्ञान होता है और जिस पर चलकर लोग अपने जीवन का सार्थक बना सकते हैं। जो भी साधक नवरात्रि में माता के इस रूप की आराधना करते हैं माँ उनके समस्त पापों का नाश करती है। अस्टमी के दिन व्रत रहकर मां की पूजा करते हैं और उसे भोग लगाकर मां का प्रसाद ग्रहण करते हैं, इससे व्यक्ति के अन्दर के सारे दुष्प्रभाव नष्ट हो जाते हैं।